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रिश्ता निभाने का हुनर उसे बखूबी आया।

                
                                                         
                            रिश्ता निभाने का हुनर उसे बखूबी आया।
                                                                 
                            
बहुत कुछ सह लेता मेरा हमदम मेरा साया।।

जिसको रिश्ता अपने अहंकार से भी प्यारा।
खुद नाराज ना होकर मुझे हर बार मनाया।।

प्रेम से सराबोर खुद अनबन की जगह नही।
मेरी परेशानी दूर करके मुझे ही गले लगाया।।

खिलखिला कर हँसने को मजबूर हो जाती।
खामोशी में शिकायत नही अद्भुत प्रेम छाया।।

जीतने की जिद्द नही हारने में बहादुर जैसा।
कितना प्यारा हृदय 'उपदेश' और मन पाया।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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2 महीने पहले

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