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मैं औरो के जैसा नही

                
                                                         
                            मैं औरो के जैसा नही बेवजह नही मुस्कुराता।
                                                                 
                            
तन्हा जीना सीख गया किसी के संग नही जाता।।

देखो तुम मुझको बेवजह गलत मत समझना।
बस जिधर सब लोग जाते मैं उधर नही जाता।।

किसी की मदद करने में सुकून आता है जरूर।
मगर उनकी बेरुखी देखकर खुद अलग हो जाता।।

हमसफ़र आफत में 'उपदेश' तो झुकने का मजा।
किसी को बेवजह झुकाने में मजा नही आता।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
34 मिनट पहले

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