मेहनत में दर्द क्या, किसी ने जाना कभी।
कीमत पूरी लगी उन्हें बेवस पैमाना कभी।।
लचीले पेड़ की तरह झेला है गम की आँधी।
मगरूर पेड़ों का देखा नही अफ़साना कभी।।
छोटे से बड़ा बनना है आसान बेशक नही।
सब्र करते जिन्दगी में बदला ठिकाना कभी।।
मेहनत बढ़ती देख किस्मत भी बदलने लगी।
छालों में अमीरी 'उपदेश' कहे ज़माना कभी।।
- उपदेश कुमार
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