आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

लचीले पेड़

                
                                                         
                            मेहनत में दर्द क्या, किसी ने जाना कभी।
                                                                 
                            
कीमत पूरी लगी उन्हें बेवस पैमाना कभी।।

लचीले पेड़ की तरह झेला है गम की आँधी।
मगरूर पेड़ों का देखा नही अफ़साना कभी।।

छोटे से बड़ा बनना है आसान बेशक नही।
सब्र करते जिन्दगी में बदला ठिकाना कभी।।

मेहनत बढ़ती देख किस्मत भी बदलने लगी।
छालों में अमीरी 'उपदेश' कहे ज़माना कभी।।

- उपदेश कुमार
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
45 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर