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कितने अच्छे लगते थे झूठ तेरे

                
                                                         
                            कितने अच्छे लगते थे झूठ तेरे।
                                                                 
                            
सम्भावनाएं जगाई थी मन में मेरे।।

तरीके बदल कर बहुमत जुटाया।
तुम्हारी लहर लगती थी मन में मेरे।।

ऐ-आई ने हर झूठ से पर्दा उठाया।
उससे तस्वीर बनने लगी मन में मेरे।।

डर की दीवारे चारो तरफ फैला दी।
उसी से दरारे पड़ने लगी मन में मेरे।।

जाने कैसे जेन-जी का भूचाल आया।
डर धूमिल हुआ 'उपदेश' मन में मेरे।।

संस्थागत दबाव दिख रहा हर तरफ।
नई आशाएं जन्म ले रही मन में मेरे।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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5 घंटे पहले

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