कितने अच्छे लगते थे झूठ तेरे।
सम्भावनाएं जगाई थी मन में मेरे।।
तरीके बदल कर बहुमत जुटाया।
तुम्हारी लहर लगती थी मन में मेरे।।
ऐ-आई ने हर झूठ से पर्दा उठाया।
उससे तस्वीर बनने लगी मन में मेरे।।
डर की दीवारे चारो तरफ फैला दी।
उसी से दरारे पड़ने लगी मन में मेरे।।
जाने कैसे जेन-जी का भूचाल आया।
डर धूमिल हुआ 'उपदेश' मन में मेरे।।
संस्थागत दबाव दिख रहा हर तरफ।
नई आशाएं जन्म ले रही मन में मेरे।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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