ख्वाब में आकर जरा अदब में रहा करे।
फिजूल की बाते हर जगह न कहा करे।।
मैं जब-जब पीछे से अचानक घेरूँ तुम्हें।
जरा कह दो हुस्न के दबाव में न रहा करे।।
बेझिझक अपनी हथेलियों से मेरा चेहरा।
पलट कर मुझ को बिना चूमे न रहा करे।।
कुछ तो लिहाज मेरी चाहतों का भी रखे।
जुल्फों के जुल्म से तल्ख़ गाल न रहा करे।।
मुझे अपना फर्ज बखूबी निभाना आता।
साँसों को 'उपदेश' लड़ाए बिना न रहा करे।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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