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खुशनसीबी

                
                                                         
                            मेरी ग़ज़ल पढ़कर मंत्रमुग्ध हो जाती।
                                                                 
                            
दो लाइनो से नाराजगी दूर हो जाती।।

प्रेम को महसूस करती खुशनसीब वो।
गले लगकर जैसे भूख ही मिट जाती।।

चमत्कार ग़ज़ल का मैंने जाना देरी से।
मुस्कुराती और मैं अन्दर खिल जाती।।

हर असंभव बात सम्भव होते देखती।
प्रेम के प्रभाव से 'उपदेश' जगमगाती।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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2 महीने पहले

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