आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

खुशबू का असर

                
                                                         
                            मैं फूल बन गई खुशबू का असर दूर तक।
                                                                 
                            
खिचने लगे है लोग खुद को मगरूर कर।।

चर्चा चारो तरफ शौहरत कहे या बदनामी।
हर किसी को मेरी याद आए मजबूर कर।।

मैं एक बार हँस दूँ तो बहारें इठलाने लगे।
हवाएँ झूमकर चूमने को बढ़ी क़ुसूर कर।।

बारिश ने बेवक्त बरस कर भिगोया मुझे।
तसल्ली अब भी नही हमको मशहूर कर।।

हर कोई अपनी दुआओ में मांगे 'उपदेश'।
प्यार के लिए खुद पर भरोसा जरूर कर।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर