आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

खेल शतरंज का

                
                                                         
                            हम जानते है ये खेल शतरंज का है मगर।
                                                                 
                            
प्यादे भी कमाल दिखाते हैं एक वक्त पर।।

हवा धीरे-धीरे बहें तब तक ठीक समझो।
आँधी बन जाए तो पेड़ उजाड़े इधर-उधर।।

जैसे मौसम बदला शोर करने लगे 'उपदेश'।
मेढक की तरह रहना ध्यान से सुनो उत्तर।।

किस तरह तबाह कर रहे तमाम जनता को।
कमाल दिखाना पड़ेगा राह सूझेगी नही अगर।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर