वो एक बार कहे या फिर हजार बार।
झूठ के पुलिंदे है कैसे करे हम एतबार।।
नुक़स सब में मगर तुम्हारे नुक़स ग़ज़ब।
पीछे ले जा रहे मुझे अच्छे नही आसार।।
जीना बे-मजा फिर भी जी रहे सहमे से।
हर साँस चाहती अच्छे दिन बुरे दुत्कार।।
मोहब्बत से निकल पाना लाजमी नही।
नींद टूटेगी जब कभी करेगें तब इन्कार।।
जीवन तो रंग मंच है 'उपदेश' सुनने का।
किराये की भीड़ में सम्भावनाएं अपार।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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