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जीने के तरीके नही बदलते मगर

                
                                                         
                            जीने के तरीके नही बदलते मगर।
                                                                 
                            
झिरी छोड़ जाते नही सम्हलते घर।।

अनदेखी पर अपनी राह निकालते।
जी जिधर करता निकल जाते उधर।।

पीड़ा के वक्त और प्रेम के अभाव में।
धीरे-धीरे कहीं के नही रहते जिगर।।

गलतियों के निशान ताउम्र जाते नही।
याद दिलाते दर्द बढ़ाते ना सुधरे अगर।।

सुधार के लिए 'उपदेश' दबाव चाहिए।
वक्त पर सही चोट लगाई जाये अगर।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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40 मिनट पहले

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