कभी मैं कभी वो मुझको राह दिखाती।
वह मेरी अच्छी बाते हर तरफ फैलाती।।
उसके गम में कभी-कभी आँसू बहाता मैं।
मेरे टूटने पर हौसला बढ़ाती नजर आती।।
जान भी ले अगर मैं गलत पहले की तरह।
गलती नज़रअंदाज करती वह नजर आती।।
वो समझने लगी उसकी दुनियादारी हूँ मैं।
उसमें मुझको अब सारी दुनिया नजर आती।।
वो देवी सबकी 'उपदेश' भगवान बनी मेरी।
जब जिद्द करती छोटी बच्ची सी नजर आती।।
मैं चाहता हर वक्त खिलखिलाती रहे वह।
बिगड़े हाल में आत्मसात करती नजर आती।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X