ख्यालों में गरिमा होगी उसका हिसाब देखेंगे।
कुछ दिन और गुजर जाने दो बेहिसाब देखेंगे।।
हर घर के दर्द निराले मगर दवा सभी की एक।
दवाई से दूरी बनाते चिड़चिड़ाते जनाब देखेंगे।।
अब न किराये की फिक्र होगी न जरूरतें होंगी।
थक हार कर सभी मोहब्बत का ख्वाब देखेंगे।।
खाली जेब का दर्द किसी को क्या पता 'उपदेश'।
गरीब आदमी के दुख दर्द का कोई जबाव देखेंगे।।
अपनी-अपनी धूप से निपटना बेकार सा लगता।
आँखों में कल की जरूरत का इंकलाब देखेंगे।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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