प्रेम में कारागार जब प्रेमी को मंजूर होता।
प्रेमी के साथ में दुख दर्द बहुत दूर होता।।
प्रेम की धारा एक गुप्त सुरंग में बहती जब।
प्रेमी के स्पर्श में जन्नत जैसा सुरूर होता।।
प्रेम के वेग में बहते जाने में सुख मिलता।
दिल के सुकून में अदृष्य अधिकार होता।।
खुशी के आवेग में तरह-तरह के किस्से आते।
अपनों को सुनाने में दिल से मजबूर होता।।
आँखों में जल छलछलाना खुशी का संकेत।
पारिवारिक समागम में 'उपदेश' भरपूर होता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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