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जाने अनजाने में मिली

                
                                                         
                            जाने-अनजाने में मिली नसीब में रही होगी।
                                                                 
                            
संयोग निखारने में खुदाई की मर्जी रही होगी।।

कितनी बार बिना कुछ किए मुस्कान ला दी।
वक्त खूबसूरत बनाने में शह तुम्हारी रही होगी।।

तुम्हारे साथ बिताए पल आज भी मेरे दिल में।
बाते करते थकते नही निस्वार्थ सेवा रही होगी।।

जिंदगी जहाँ भी रखे दिल का एक हिस्सा तुम।
शुक्रगुज़ार रहूँगा अहमियत दिल में रही होगी।।

तुम हमेशा दिल में पहले जैसी रहो 'उपदेश'।
मेरे लिए मायने तुम्हारे लिए जरूरत रही होगी।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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एक महीने पहले

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