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इतने खुश-क़िस्मत नही

                
                                                         
                            गुज़रती जिंदगी को देखने क्यों नही आता।
                                                                 
                            
दिल का सूनापन रफ्ता-रफ्ता रफ़्तार पाता।।

सच कहती हूँ तुम इतने खुश-क़िस्मत नही।
अगर होते तो मेरी दीदो को तसव्वुर आता।।

एक नजर की आरज़ू जो मोहब्बत से भरी।
उस लम्हे को खुशनुमा बनाने कुँअर आता।।

यह दौलत पद प्रतिष्ठा किस काम के मेरी।
अगर हो दिल तेरा धड़कन मेरी बहार आता।।

अब तो बन्धन बच गया नाम का 'उपदेश'।
अब रातों की सौगात नही कैसे लहर आता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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एक महीने पहले

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