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इतिहास पुराना

                
                                                         
                            मेरी खामोशी पर अपने प्रेम का हाथ रखो।
                                                                 
                            
मेरे भीतर सोई हुई जलधाराओ को परखो।।

तुम्हारे प्रेम की उंगलियों का इतिहास पुराना।
नसों में एक नदी कैद उनकी हलचल परखो।।

अपनी निस्तब्धता के साथ कही बह निकले।
अनगिनत स्पर्श स्मृतियों की भागीरथी परखो।।

तुम्हारी निकटता पाकर तट भूल जाना चाहती।
अपनी दृष्टि से जरा समस्त अस्तित्व को परखो।।

किस तरह कम दबाव फिर से कुलबुलाने लगे।
नदी की तरह बहाव 'उपदेश' स्पर्श कर परखो।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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2 महीने पहले

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