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इश्क इबादत बना

                
                                                         
                            ये शाम तुम्हारी सोच पल भर की बेचैनी।
                                                                 
                            
पलकें मूंदती आँखें उनके बिन यही होनी।।

देखते-देखते ख्याल बदल जाते ख्वाबों में।
हाथ पकड़कर उड़ने लगते देखकर हैरानी।।

चाँद सितारे गुल महक प्रेम छिपते ही नही।
उनकी खूबियों के आगे धक-धक बेईमानी।।

इश्क इबादत बन चुका जाने कब 'उपदेश'।
तन्हाई के पूछने पर चर्चाएं चली तो जानी।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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2 महीने पहले

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