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होंठों पर तेरा नाम आता

                
                                                         
                            ख्वाबों में तूँ मुझको किस तरह सताता।
                                                                 
                            
कह नही पाती होंठों पर तेरा नाम आता।।

तूँ मुझमें रहे या मैं तुझमें रहूँ एक ही बात।
बंद आँखो में हर ओर बखूबी नजर आता।।

दिमाग बेखौफ चलता रुकता ही नही अब।
कोई देखता मेरी ओर लगता है मुस्कुराता।।

वैसे तो जिंदा हूँ मगर अपने को होश कहाँ।
याद में डूबा खुली आँखो से कम देख पाता।।

तेरा ज़िक्र करने को मन तो करता 'उपदेश'।
मगर कुछ सोचकर संकोचवश मुकर जाता।।

दिल में हलचल जुबान बन्द आँखों के अन्दर।
जिस्म हकीकत में तुम्हें स्पर्श करना चाहता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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12 घंटे पहले

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