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हर लम्हा याद आए

                
                                                         
                            तेरे साथ में गुजारा हर लम्हा याद आए।
                                                                 
                            
गलती क्या हुई आनलाईन नज़र न आए।।

तेरे रंग के जादू छितराते ही नही क्या करे।
बेकाबू हो जाने का कोई तरीका न आए।।

हकीकत कुछ और रही बदलते परिवेश में।
मगर तस्वीर में तूँ आज वैसी नज़र न आए।।

तूँ जो बनाती है पसंदीदा तो नही 'उपदेश'।
समझने लगी कुछ कुछ वैसा समझ न आए।।

कोई जगह नही छोड़ी जहाँ पर खुशबू नही।
हवा चलती नही अब उसको चलन न आए।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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22 घंटे पहले

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