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हमसफ़र ठीक

                
                                                         
                            तुम दूर हो ये ठीक है
                                                                 
                            
मैं अकेली हूँ ये भी ठीक है
सब को बताती हूँ खुद
अपना हमसफ़र ठीक है

हर रात को नींद में उतरती
आँखों को पलकों का साथ ठीक है
थोड़ी बहुत टूटी हुई होती
फिर भी ख्वाब में अधीर ठीक है

व्यथित आँसू गाल धोते
सहलाते तुम्हारे हाथ पीर ठीक है
तमन्ना पूरी करना 'उपदेश'
लौट आना तोड़कर ज़मीर ठीक है
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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2 महीने पहले

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