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नदियाँ देखो सब के पापो को धोकर 'उपदेश'।

                
                                                         
                            मन मैत्री को लालायित प्यारी हो सकती है।
                                                                 
                            
कुछ मैं कुछ तुम समझो आभारी हो सकती है।।

भारी जवानी में निरंकुश निर्णय हो जाया करते।
जीवन भर की संगति भी लाचारी हो सकती है।।

गलती थोड़ी मेरी, थोड़ी तुम्हारी अक्सर होगी।
उस वक्त ग़म और खुशियाँ आधी हो सकती है।।

आधी आँखें मूँद कर रखो आपस की बातों पर।
जिन बातों पर आँखें गहरी गीली हो सकती है।।

नदियाँ देखो सब के पापो को धोकर 'उपदेश'।
खुद भी धीरे-धीरे बेवजह ही मैली हो सकती है।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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11 घंटे पहले

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