दर्द देने की कोशिश जितनी उनकी रही।
सहन करने में मेरी हौसलाअफजाई रही।।
आँसू आए जरूर निगाह में दुनिया के।
उतनी ही इस सरकार की जगहँसाई रही।।
अटल रहे अपने अभियान में कॉकरोच।
एकता रंग लाई 'उपदेश' की जम्हाई रही।।
कोशिशों से संघर्ष को त्योहार बना दिया।
मौसम को अपनाना ही सबकी दवाई रही।।
वक्त के साथ-साथ किस तरह झुक गए।
कुछ शर्तों के साथ ही पद से विदाई रही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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