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एक ख्याल

                
                                                         
                            एक ख्याल तुम्हारा जाता नहीं वज़ूद से।
                                                                 
                            
जन्मदिन बहाना आता दोहरी उम्मीद से।।

बैठे-बैठे तन्हाई में मुस्कुराती रहती रोज।
कहना चाहती मगर पाला प़डा जिहाद से।।

कितनी देर कर दी फिर भी मिलना होगा।
अगर पलट कर आ भी जाते फ़रियाद से।।

तुम्हारी जगह झाड़ फूँक कर साफ करती।
हाथ फेरते-फेरते नींद आती गहरी याद से।।

ये दिल के रिश्ते को क्या नाम दूँ 'उपदेश'।
निभाने की चाहत और भी बढ़ती संवाद से।।
-- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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3 महीने पहले

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