हमारे दिन गुजरने लगे बेहद सब्र से खामोशी से।
तमाम राते कटने लगी 'उपदेश' करवटो की मारी।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X