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दिलो-दिमाग से मोहब्बत

                
                                                         
                            जब कोई इंसान आपके दिमाग में तैरता रहता।
                                                                 
                            
वह भी तुम्हें अपने दिमाग से नही निकाल पाता।।

इस तरह की घटना कोई सहज घटना नही होती।
अच्छा लेगे या बुरा दोनों तरफ माजरा एक रहता।।

कभी-कभी ये जुड़ाव दिल का या अधूरी कहानी।
ऐसे को अन्तिम साँस तक भुलाना कठिन रहता।।

बेशक दिलो-दिमाग में जगह बना लेता 'उपदेश'।
लाख कोशिशों के बाद भी हटाना मुश्किल रहता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

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