आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

दिल थकता नही

                
                                                         
                            दिल थकता नही सफर पर रहता।
                                                                 
                            
भावुक होने पर क्या कुछ कहता।।

लोग कमजोर समझ बैठे दिल को।
आवृति मिल जाने पर कुछ कहता।।

एक बार जिसे दिल दिया ना लिया।
हर बार किस्त की तरह लेता रहता।।

बिछुड़ा अगर एक बार फिर देखा।
ज़ख्म दे जाता वह कभी न भरता।।

जिसको चाट गई धूप की ख्वाहिश।
वो फूल 'उपदेश' फिर कभी खिलता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
23 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर