आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बिना नाम के रिश्ते

                
                                                         
                            बिना नाम के रिश्ते भी कभी-कभी।
                                                                 
                            
जिन्दगी में सच्चे दिखते कभी-कभी।।

प्रेम का ध्येय किसी को बाँधना नही।
समझ लेना भी होता है कभी-कभी।।

बिना वायदों के एक दूसरे का ख्याल।
टेलीपेथी जैसा लगता है कभी-कभी।।

संग में रहने वाला होगा जीवन साथी।
कोई दूर से रिश्ता चलाता कभी-कभी।।

रिश्ते नाम के मोहताज नही 'उपदेश'।
गैर भी अपना सा लगता कभी-कभी।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर