जज्बातों की कीमत टूटे दिल समझेंगे नही।
भूख जिंदा मगर फिर से अब खरीदेंगे नही।।
आँखों से पानी बहना जिससे बन्द हो चुका।
मोहब्बत में बेतुकी रार शायद समझेंगे नही।।
बुरा वक्त किसका है मेरा भी या उनका भी।
इस ज़माने में 'उपदेश' देने वाले समझेंगे नही।।
उनके अन्दर का इंसान अब भी ज़िन्दा होगा।
बिछुड़ने का अर्थ जानते उसको समझेंगे नही।।
रोशनी में बैठकर अँधेरे को पूजने वाले प्रेमी।
दिल को जलने से अन्दर दीवाली समझेंगे नही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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