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बेहाल दिल

                
                                                         
                            रिश्ते में थक कर चिड़चिड़ा हो गया।
                                                                 
                            
गिला किससे करे वो मुहाल हो गया।।

वो दोस्त बढ़िया था मैंने ही खो दिया।
असमंजस में होकर मन लाल हो गया।।

बिखरे पत्तों की तरह बेहाल दिल मेरा।
हाल पूछने वाला जैसे ख्याल हो गया।।

लालच नजरअंदाज कर देता दीवानगी।
गिरेबां में झाँकना एक सवाल हो गया।।

अपने दाग देखना कौन चाहे 'उपदेश'।
पलट कर देखने वाला दलाल हो गया।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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3 महीने पहले

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