बात रूखी रूखी मिलावट बिलकुल नही।
गर्म जोशी तेवरों वाली कौतूहल बिलकुल नही।।
उल्फत में नफ़ा नुकसान का हिसाब किसे।
जौहर पारखी बहुत बेज़ा जबाव बिलकुल नही।।
हर बात मोहब्बत में नही कह सकते जनाब।
ध्यान लिखने पर उस वक्त बात बिलकुल नही।।
ख़फ़ा जैसे हालात उनकी आवाज से जाहिर।
बिचौलियों की तरह उनसे बात बिलकुल नही।।
दरिया की तरह पत्थरों से टकराने वाले 'उपदेश'।
मन उनका भी सागर जैसा शांत बिलकुल नही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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