बचपन के खेलो में फरेब का होना।
छेड़छाड़ के लिए बनावटी जादू-टोना।।
दिल बच्चा होकर हरकते बड़े जैसी।
परीक्षण करते वक्त जिस्म को टटोलना।।
मुस्कुराने के लिए तहजीब बे-जरूरत।
हँसी ना आने पर चुटकी से काट लेना।।
तजुर्बा कच्चा मगर लीलाएं पक्की रही।
प्यार के नाम पर जगह-जगह चूम लेना।।
इंतजार रहता खेल में एकजुट 'उपदेश'।
छुपा-छुपी के बहाने इधर-उधर ढूँढना।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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