हर रिश्ते से अपेक्षा घट सी गई।
चढ़ती उमर से मैं बदल सी गई।।
अब चुपचाप सुन लेती होले से।
अंजाम समझकर बहल सी गई।।
जिन्हें मेरे होने का एहसास रहा।
उनकी अंतरात्मा कमल सी गई।।
दुनियादारी में पकड़ कर सीखा।
प्रतिक्रिया की हवा महल सी गई।।
जगह जगह की खाक छान रही।
आत्मसम्मान की हलचल सी गई।।
जिनको मेरी कदर वो सामने नही।
मन शांत रहे 'उपदेश' जेल सी गई।।
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