पहले प्यार की तस्वीरे रह रहकर तैर जाती।
पुराने सपने अधूरी बाते मन में कौंध जाती।।
यादो का आलम छू लेता मन को आज भी।
कुछ करती कुछ और करने को खो जाती।।
उँगली फ़रिश्ता की पकडकर जोश बढ़ता।
माँ की बाते रास्ता कुछ बनने को उकसाती।।
मन जब जब बेचैन होता आँसुओं की धार।
खुद पर काबू करके फिर पढ़ने लग जाती।।
यादो का मोल अनमोल जीवन का आधार।
कभी हँसी 'उपदेश' खुद-ब-खुद आ जाती।।
आज हर कोई सराहना करते नही थकता।
मेरी प्रतिभा के चर्चे की गूँज घूमकर आती।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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