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आज का जवान

                
                                                         
                            कोई उलझा कर देखे छोड़ते नही।
                                                                 
                            
उनके चेहरे पर कभी सिलवटें नही।।

मधुमक्खियों जैसा व्यवहार उनका।
होता मुक़ाम खास लेते करवटें नही।।

पत्थर की तरह है उद्देश्य खास होगा।
मूंग दल रहे उनकी राह में काँटे नही।।

रखते जुबान वे भी वक्त पर सुनाएंगे।
आ जाए अपने पर लाठियां बाँटे नही।।

गलती हर एक बार बख्शी न जाएगी।
माफी 'उपदेश' उनकी वक्त काटे नही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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2 महीने पहले

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