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आदत पुरानी

                
                                                         
                            मुझे प्यार करने की आदत पुरानी।
                                                                 
                            
मन करता मगर होती नही मनमानी।।

दिल की बाते भी ग़ज़ल में कर रहा।
गुमसुम है जो कभी रहती थी दीवानी।।

इस कदर की जुदाई पहले कभी न थी।
मजबूर लगती जैसे ढ़ल गई हो जवानी।।

आओ सजा कर ख्वाबों की दुनिया को।
हकीकत से दूर हो सैर-सपाटा की रानी।।

पास आने से पहले मेरा दिल 'उपदेश'।
दोहराना चाहता फिर से तट की करानी।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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