भारत की ओजस्वी नेत्री की
आज सांसें सिमट गई ।
उनके पार्थिव शरीर पर
देखो तिरंगा लिपट गई ।।
स्वर्गीय सुषमा जी को आज
कोटि कोटि नमन हमारा ।
कैसे भारत भूल सकेगा
लाखों उपकार तुम्हारा ।।
भारतवासी निःशब्द हुये
आँखें भी सबकी नम हुई ।
चीत्कार उठी भारत माता
मेरी भी छति क्या कम हुई ?
मेरे सामने जो लेटी
है मेरी ओजस्वी बेटी ।
फिर से कब कहाँ पाऊंगी
ऐसी वीरांगना बेटी ।।
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
कमेंट
कमेंट X