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हर क्षण-क्षण में ही तो इसका स्वरूप है।

                
                                                         
                            पेड़ हमारे सच्चे साथी हैं,
                                                                 
                            
हर जीवन में प्रार्थी हैं।
सृष्टि के हर कण-कण,
हर क्षण-क्षण में ही तो इसका स्वरूप है।
धरती की खुशहाली,
धरती की हरियाली,
जीवन की जान,
वातावरण की पहचान।
का आधार ही तो पेड़ हैं।

कुछ मूर्खों, अभिमानी, लालची, स्वार्थी
लोगों ने किया, जीवन का आधार का विनाश।
आधार नहीं तो प्राण नहीं,
प्राण नहीं तो आधार नहीं।
यही तो एक जीवन का अंश का आधार है।

पेड़ों को ना काटो, ना विनाश करो।
इस जीवन का नया प्रवाह करो।
उनको भी हर जीव की तरह जीने का अधिकार है।
हर दुःख हर सुख में, देते हमारा साथ।
यदि पेड़ नहीं, जीने का आधार नहीं।
हमें भी उनके प्राणों की रक्षा करनी चाहिए।
कलियुग के इस भीषण प्रकोप से बचने का आधार ही यही है।
अपनी नई पीढ़ी और नए जीवन के बारे में जरा सोचो।

पेड़ हमारे सच्चे साथी हैं,
हर जीवन में प्रार्थी हैं।
-पुष्पेन्द्र कुमार राजेश्वरी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

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