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तू कहे तो

                
                                                         
                            तू कहे तो आ जाऊं ,
                                                                 
                            
तू कहे तो ना ,
तेरे ऊपर छोड़ दिया-
अपना आना जाना ।

उम्र आधी कट गई,
काश! समझ पाती ।
अपने तेज बोली में,
थोड़ी तो नरम लाती ।
खुदा ने दिया है,
स्वर तुम्हारे कंठ में,
काश! तुम स्वर को ,
ईश्वर समझ पाती ।

हक से हां भी,
अब तो कहा नहीं जाता।
क्या पता किस बात पर,
तूफान है आ जाता।
घर के सुख शांति -
सपनों में खो गया।
एक शब्द भी मेरा ,
उसके कानों में जो गया ।
तहलका इस कदर,
कि फिर हाय तौबा हाय -
सड़क गली मोहल्ला -
एक-एक कान तक आवाज जाए ।
क्या है ये -
यह कैसी जिंदगी है ।
दो तरफा धार पर -
चल रही जिंदगी है।
काश की बोली शब्दों में खुली,
मीठे शहद सी होती।
कानों को रास आते तब,
झगड़ा भी, बोली भी।

अब तो एक ही रास्ता है।
अब कुछ ना बोलूंगा मैं ।
तू कहे तो आ जाऊं,
तू कहे तो ना -
तेरे ऊपर छोड़ दिया -
अपना हर फैसला।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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