नूर का चाँद नज़र आया है नज़रों में,
आज रात ने ख़ामोशी पहन ली है ग़ज़लों में
हवाएँ भी थमकर तेरा नाम सुनती हैं,
रौशनी भी झुक गई है तेरी नज़रों में
तेरी आँखों में ठहरी हुई एक शाम है,
सादगी से लिपटी हुई तेरी पहचान है
कदमों की आहट में ग़ज़ल बसती है,
तेरे होने से ख़ामोशी सजती है |
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