आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

नज़रों में

                
                                                         
                            नूर का चाँद नज़र आया है नज़रों में,
                                                                 
                            
आज रात ने ख़ामोशी पहन ली है ग़ज़लों में
हवाएँ भी थमकर तेरा नाम सुनती हैं,
रौशनी भी झुक गई है तेरी नज़रों में
तेरी आँखों में ठहरी हुई एक शाम है,
सादगी से लिपटी हुई तेरी पहचान है
कदमों की आहट में ग़ज़ल बसती है,
तेरे होने से ख़ामोशी सजती है |
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर