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बढ़ते रहें कदम

                
                                                         
                            कदम कदम यदि थकें कदम, फ़िर भी बढ़ते रहें कदम।
                                                                 
                            
थोड़े कदम कभी अधिक क़दम, राह चलते रहें कदम।।
शूल मिलें यदि कदम कदम,तो भी न रुकें चलते कदम।
ज़ख्मों से बहते लहू दर्द को, पीकर भी बढ़ते रहें कदम।
न थमते क़दम वक्त के,वक्त कदम से मिलते रहें कदम।
है जीवन की सच्ची रीत यही,हरदम गतिमान रहें क़दम।
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एक घंटा पहले

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