आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सिर्फ अंधेरा नहीं होता दिन ढलने के बाद

                
                                                         
                            सिर्फ अंधेरा नहीं होता दिन ढलने के बाद
                                                                 
                            

एक फूल मुर्झा जाता है दिन ढलने के बाद
एक पंछी घर से खो जाता है दिन ढलने के बाद
चमकते तारे टूट जाते है दिन ढलने के बाद

सिर्फ अंधेरा नहीं होता दिन ढलने के बाद

जिने की उम्मीद टूट जाती है दिन ढलने के बाद
आंखों के पास समुद्र आ जाते हैं दिन ढलने के बाद
सवेरा बहुत दूर चला जाता है दिन ढलने के बाद

सिर्फ अंधेरा नहीं होता दिन ढलने के बाद


कोई अकेला रह जाता है दिन ढलने के बाद
कोई याद आ जाता है दिन ढलने के बाद
चहरा उदास हो जाता है। दिन ढलने के बाद

सिर्फ अंधेरा नहीं होता दिन ढलने के बाद

खुद पे शर्म आती है दिन ढलने के बाद
खुदा से शिकायत होती है दिन ढलने के बाद
एक उमर कम हो जाती है दिन ढलने के बाद

सिर्फ अंधेरा नहीं होता दिन ढलने के बाद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर