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अपना देश हैं

                
                                                         
                            ना म किसी की सत्ता का
                                                                 
                            
ना सत्ता का म प्यासा हु
इस देश को जो अपना समझे
मं पाक शायर उसका हु

कुछ धर्म बचाने निकले हैं
कुछ आग लगाने निकले हैं
कुछ ओर है जो मेरी तरह
बस बात बनाने निकले है

ये कोनसे युवा नेता हैं जो
सरकारो में निकल गए
मानवता की बात करो तुम
गद्दी देख के फ़िसल गए

कुछ तो राजा श्रम करो
ये देश तुम्हारे हातो में
धर्म ओर जाति एक तरफ
ना आओ इनकी बातो में

कुछ माये मेरी ऐसी है
जो पत्थर दिल है रोती नहीं
कुछ कच्ची बस्ती ऐसी है
जो भूख के मारे सोती नहीं

तुम देखो इनकी आँखो में
ये तुमसे ही क्यों कहते हैं
एक आस जुड़ी है तुमसे इनकी
तुम पर कितना मरते हो

तुम खुद महलो के मालिक हो
यहाँ तुमसे बेहतर कोई नहीं
तुम ऐसी दौड़ में भाग रहे
जहां तुमसे आगे कोई नहीं

धर्म के नाम पर लड़ा रहे हो
ये तो बताओ रुकना है क्या
सर झुके है ओर बता दो
घुटनों पर भी झुकना है क्या

चंद बची है सांसे हमारी
भर चुकी हैं आंखे हमारी
सरकारें हैं धर्म में उलझी
कौन सुने यहां बाते हमारी

ले देके तुम दो सरकारें
दोनो धर्म में उलज रहे
सालो बाद घाव भरे थे
धीरे-धीरे सुलग रहे

ये देश तुम्हारा अपना है
हम भी तुम्हारे अपने है
थोड़ा हम पर रहम करो
तुमसे कितने सपने हैं

आज कौन है राजा मतलब नहीं
कल कौन बनेगा मतलब नहीं
मतलब है सत्ताधारी से
जो मुंह फेरे गद्दारि से
नजरे उठा कर ऊपर देखे
जाती धर्म की बारी से
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2 महीने पहले

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