मन्नतों में तेरा जिक्र कब तक करे
उम्र गुजरने वाली है तू बता तेरी फिक्र कब तक करे
कोई बहाना मिल जाए जी भरके रोने का
यू बारिशों का इंतजार कब तक करे
अंधेरा हुआ नहीं कि हम तुझमें खो जाते है
हमारी फिक्र भला ये सवेरा कब तक करे
तुम्हारे बालों में अच्छे लगते है फूल मगर
हम भला इन बगीचों की रखवारी कब तक करे
उमर गुजर गई मगर उम्मीद जिंदा है
ये कब्र खोदने वाले भला मेरा इंतजार कब तक करे
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