आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

इंतजार कब तक करे

                
                                                         
                            मन्नतों में तेरा जिक्र कब तक करे
                                                                 
                            
उम्र गुजरने वाली है तू बता तेरी फिक्र कब तक करे

कोई बहाना मिल जाए जी भरके रोने का
यू बारिशों का इंतजार कब तक करे

अंधेरा हुआ नहीं कि हम तुझमें खो जाते है
हमारी फिक्र भला ये सवेरा कब तक करे

तुम्हारे बालों में अच्छे लगते है फूल मगर
हम भला इन बगीचों की रखवारी कब तक करे

उमर गुजर गई मगर उम्मीद जिंदा है
ये कब्र खोदने वाले भला मेरा इंतजार कब तक करे
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर