राम राम जय राजा राम
राम राम जय सीता राम
मन को मोह लेता है
इंसान को पूर्ण भक्ति में निचोड़ देता है
ये पवित्र शब्द बोलते ही
मन को अदभुत शांति मिल गई हो जैसे
जैसे जीवन में सबकुछ मिल गया हो मानो ऐसे
ये भक्ति का सार है
ये निस्वार्थ प्रेम की बौछार है
ये पवित्र दिए के जैसे
अटूट विश्वास व श्रद्धा है
जो हमें परमात्मा से जोड़ती है
मन को निर्मल कर देती हैं।
राम राम जय राजा राम
राम राम जय सीता राम
हे राम जी, मेरे प्रभु जी
आपको दिल से प्रणाम
इस समस्त जगत को
श्री राम के नाम से प्रणाम
मेरा कोटि - कोटि प्रणाम।
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