बनारस की जरी रेशम की चुनरी ले के आएँगे
महावर पग में कलकत्ते की लाकर हम लगाएँगे
तपस्या में मगन शम्भू का मन भी डोल जाएगा
नई दुल्हन के जैसे नौ दिवस माँ को सजाएँगे
— त्रिशिका धरा
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