वर्षा वह कुसुम बालिका सी ।
मुस्काती उतर रही नभ से। ।
परिधान लपेटे धूम्रवर्ण।
उड़ते हो मानो सर सर से।।
कभी आसमान कभी भूधर सर।
कभी लचक लचक चलती पथ पर।।
कभी विटपो के हिलते दल पर।
किन्सुक कलिका व कोपल पर।।
पग में पाजेब के नूपुर सी।
झन झन झनके झिल्ली झर झर।।
मन मोद भरे भेका भेकी।।
भूतल से निकले कर टर टर।।
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