साँवरिया बिन मोहे चैन न आवै,
श्री राधे-नाम हियरा हरषावै॥
नैनन बाट निहारत थाके,
पवनहुँ भी संदेश न लावै।
बाँसुरिया की मधुर तान सुनि,
मन ब्रज-कुंजन उड़ि-उड़ि जावै॥
-दीपा
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