जब सकल जगत की नव पीढ़ी,
अंग्रेजी मय हो जाएगी,
जिसके कारण दुनिया में इक दिन,
घोर प्रलय आ जाएगी,
भारत का मान बढ़ाने को फिर,
खड़ी कोई सिंधी होगी,
वो भाषा कोई और नहीं,
अपनी प्यारी हिंदी होगी [1]
जो नमस्कार की संस्कृति थी, ,
वो भी अब टाटा बाय हुई,
पहले लेते थे हाल -चाल,
अब केवल हैलो हाय हुई,
मॉडर्न बनो चाहे जितना,
जिह्वा ना खोली जाएगी,
हिंदी,हिंदी है इसके बिन,
इंग्लिश ना बोली जाएगी [2]
अंग्रेजी के चक्कर में दूषित,
मन का कोना - कोना है,
पतिदेव हुआ करते जो,
अब केवल बाबू-सोना हैं,
प्रियतम की आयु बढ़ाने को,
मस्तक जो धारी जाएगी,
हिंदी की बिंदी बिन बिंदी,
बिंदी ना पुकारी जाएगी [3]
-धीरेंद्र धीर
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