कभी-कभी ज़िंदगी में ऐसे मोड़ आ जाते हैं,
जहाँ समझ ही नहीं आता… रुक जाएं या आगे बढ़ जाएं।
ज़िंदगी किसी की मोहताज नहीं होती,
हम यहाँ ऊपरवाले की मर्ज़ी से आए हैं,
और उसी की मर्ज़ी से एक दिन चले भी जाएंगे।
न कोई हमें ज़िंदगी दे सकता है,
न कोई हमसे उसे छीन सकता है…
सब कुछ पहले से कहीं लिखा हुआ है।
हर इंसान इस दुनिया में किसी न किसी मकसद से आता है,
कोई भी बेवजह नहीं होता।
लेकिन कभी-कभी ऐसा लगता है…
जैसे कुछ ज़िंदगियाँ दर्द के लिए ही लिखी गई हों,
जैसे कुछ दिलों को थोड़ा ज़्यादा महसूस करने के लिए चुना गया हो।
शायद कुछ लोग ऊपरवाले के खास होते हैं,
जिनकी ज़िंदगी सोने की कलम से लिखी जाती है…
और फिर कुछ लोग हम जैसे होते हैं—
जो बाहर से मुस्कुराते हैं,
लेकिन अंदर ही अंदर हर रोज़ थोड़ा-थोड़ा टूटते रहते हैं…
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