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बचपन जीते हैं........

                
                                                         
                            चलो आज फिर से बचपन जीते हैं
                                                                 
                            
उधड़ गए रिश्ते फिर से सीते हैं।
याद कहानियाँ क्या आज भी हैं
कुछ तुम सुनाओ कुछ हम कहते हैं।।
तेरे दिल की मुझे पता थी मेरे दिल की तुझको
फिर से एक दूजे के दिल में धड़कते हैं।।
जो लगाया था समाप्ति का विराम हमने
मिलकर वहीं फिर से एक कोमा(,,,) रखते हैं।।
बहुत सुना दुनिया से एक दूजे के बारे में
आज चल एक दूजे को रूबरू करते हैं।।
तेरे दिल का हिस्सा मैं मेरे दिल का टुकड़ा तू
इन हिस्सों को इनकी जगह पे रखते हैं।।
चलो आज फिर से बचपन जीते हैं।।
-तनीषा
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2 महीने पहले

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